बिहार के इस युवा IAS का स्टाइल है सबसे अलग,निकल पड़ते हैं पैदल, कभी लाइन में लग डालते हैं वोट

माज को सुधरने की नसीहतें देना तो आसान है, लेकिन सच्चा प्रेरक वही है जो आगे बढ़कर सुधार का एक उदाहरण बने। कुछ ऐसे ही हैं बिहार के गोपालगंज के युवा कलेक्टर राहुल कुमार। राहुल कुमार एक चर्चा में तब आये जब एक विधवा को मिड डे मील बनाने से रोके जाने की खबर मिलने पर डीएम राहुल ने खुद स्कूल पहुंचकर उसी विधवा के हाथ का बना खाना खाया। सोशल साइट्स पर इस युवा आईएएस को लोग सैल्यूट कर रहे हैं। कलेक्टर राहुल कुमार कहीं भी ऐसा कोई अतिरिक्त लाभ अपने रुतबे का नहीं लेते।

उनकी जीवन शैली भी बेहद साधारण है। कई बार वे बिना सरकारी गाड़ी के पैदल ही घूमते हैं। एक स्कूल में एक महिला को सिर्फ इसलिए मिड डे मील बनाने से रोका गया कि वो विधवा है। जैसे ही इन्हें पता चला, ये स्कूल में पहुचे और उसी के हाथ का बना खाना खाया। उनके इस कदम की सराहना प्रशासनिक सेवा के अन्य अधिकारियों ने भी अपने फेसबुक वॉल पर की है।

झारखंड कैडर की सीनियर आईएएस पूजा सिंघल ने भी अपने फेसबुक पर गोपालगंज के डीएम राहुल कुमार की तारीफ की है। उन्होंने लिखा है – Small gestures with big impact!!

राहुल कुमार की गोपालगंज में बतौर डीएम पहली पोस्टिंग है।

वे बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहान इलाके के रहने वाले हैं। बीते विधानसभा चुनाव में कतार में खड़े होकर वोट देने के लिए भी वो आम लोगों के बीच चर्चा में रहे थे। चुनाव के दिन गोपालगंज के आदर्श पोलिंग बूथ पर आम लोगों के साथ लाइन में खड़े होकर उन्होंने वोट डाला।



चुनाव से पहले ही इनकी यहां पोस्टिंग हुई और इन्होंने जिले के गांव-गांव में जाकर आम लोगों को वोट देने के लिए उत्साहित किया। इनके कैंपेन ने इलाके के लोगों को प्रभावित किया और चुनाव में बड़ी संख्या में आम लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राहुल कुमार ने इनसे संबंधित तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर शेयर की थीं, जहां इनके इन प्रयासों की भी प्रशंसा हुई।

राहुल कुमार बचपन से ही आईएएस बनना चाहते थे। वर्ष 2010 में परीक्षा दी तो आईपीएस के लिए चुने गए। दिल नहीं लगा। दोबारा परीक्षा में बैठे। वर्ष 2011 में आईएएस बन गए। इनके पिता शिक्षक थे। आईएएस बनने के बाद राहुल दानापुर (बिहार) के एसडीएम बनाए गए।

फिर हेल्थ डिपार्टमेंट में प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर रहे। बिहार हेल्थ एड्स सोसायटी के एडिशनल सेक्रेटरी के पद पर थे, वहां से गोपालगंज के डीएम बनाकर भेजे गए। राहुल कुमार ने बताया कि वे जब तक आईएएस रहेंगे, लोगों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करते रहेंगे।

उनकी तमन्ना है कि लोगों की जिंदगी बदले। आज लोग चांद और मंगल पर जा रहे हैं और कई लोग अंधविश्वास में जकड़े हुए हैं। इसी स्थिति को बदलना उनका लक्ष्य है। राहुल कुमार के ट्विटर व फेसबुक अकाउंट पर हजारों फॉलोअर्स हैं। फेसबुक पर इन्हें लगभग तीन हजार लोग फॉलो करते हैं।

वहीं, लगभग पांच हजार लोग इनके फ्रेंड लिस्ट में हैं। अपनी एक्टिविटी की सूचनाएं राहुल अक्सर फेसबुक व ट्विटर पर प्रशंसकों को देते रहते हैं। गोपालगंज के कल्याणपुर गांव में एक सरकारी स्कूल में सुनीता खाना बनाती थीं। वे विधवा हैं। उनके खाना बनाने पर पिछले दिनों गांव के लोगों ने एतराज जताया।

पिछले दिनों 150 लोगों ने स्कूल को घेर लिया। स्टूडेंट्स और टीचरों को निकालकर वहां ताला लगा दिया गया। जानकारी के मुताबिक, सुनीता को खाना बनाने वाले छह लोगों की टीम में रखा गया था। ये टीम स्कूल के 734 बच्चों के लिए खाना बनाती थी।

inspirational story of gopalganj dm rahul kumar
Pic Credit: Amar Ujala

आरोप है कि इस गांव में अगड़ी जाति के लोगों ने धमकी दी थी कि यदि दोबारा सुनीता को यहां देखा गया तो अच्छा नहीं होगा। स्कूल का दौरा करने के बाद डीएम ने ट्वीट करते हुए कहा, ”कुछ गुमराह गांव वालों ने विधवा को मिड डे मील बनाने से रोकने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था कि वे स्कूल से अपने बच्चों को वापस बुला लेंगे।” स्कूल में विधवा के हाथ से बना खाना खाने के बाद उन्होंने ट्वीट किया ”लोगों के मिथ को तोड़ने के लिए कभी-कभी आपको ऐसा करना पड़ता है। मैंने उसी विधवा महिला से खाना बनवाया और उसी ने मुझे खाना परोसा।”

दो बच्चों की मां सुनीता ने अपनी नौकरी बचाने के लिए पिछले दिनों गोपालगंज के डीएम राहुल कुमार से गुहार लगाई थी। डीएम ने मदद का भरोसा दिया था। डीएम ने आदेश दिया कि विधवा महिला ही उस स्कूल में मिड डे मील बनाएगी।



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