History Notes: महत्वपूर्ण सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन (भाग I)

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महत्वपूर्ण सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन (भाग I)

यंग बंगाल आंदोलन

1. संस्थापक – हेनरी विवियन डेरेजियो
2. वो हिन्दू कॉलेज में एक अध्यापक थे (1826 – 31)
3. उन्होंने कई मेधावी छात्रों को आकर्षित किया, जो डेरोज़ियंस या यंग बंगाल के नाम से जाने जाते थे.
4. महिला शिक्षा और अधिकारों का समर्थन करते थे.
5. हेनरी डेरोजियो संभवतः पहले राष्ट्रवादी थे.
6. आधुनिक भारत के कवि.
7. उनके अतिवाद के कारण 1831 में उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया.
8. डेरोज़ियंस को बंगाल की आधुनिक सभ्यता का अग्रदूत कहा जाता था. तथापि, उन्होंने आगे सार्वजनिक शिक्षा का कार्य किया & कंपनी चार्टर में संशोधन, उच्च सेवाओं का भारतीयकरण एवं जूरी द्वारा परीक्षण जैसी मांगे रखीं.

ईश्वर चन्द्र विद्यासागर

1. प्रसिद्ध संस्कृत विद्वान, 1850 में संस्कृत कॉलेज के प्रधानाचार्य बने और वहां पश्चिमी विचारों/शिक्षा की शुरुआत की.
2. उन्होंने संस्कृत शिक्षण की नई पद्धति विकसित की.
3. उन्होंने विधवा पुनर्विवाह के समर्थन में एक आंदोलन शुरू कर दिया जिसका परिणाम विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 था.
4. पहली, कानूनी हिन्दू विधवा पुनर्विवाह 1856 में विद्यासागर की देख-रेख में हुआ था.
इन्होने बाल विवाह का भी विरोध किया.
वह लड़कियों के पहले विद्यालय, बिथयून स्कूल, कलकत्ता 1849 के सचिव भी थे.

वेद समाज – 1864, (मद्रास)

1. संस्थापक – धरलु नायडू
2. केशवचन्द्र सेन से प्रेरित होकर
3. “दक्षिण भारत का ब्रम्हा समाज” के नाम से भी लोकप्रिय

बालशास्त्री जम्बेकर

1. बंबई में अग्रणी सुधारकों में से एक, उन्होंने ब्राह्मणवादी प्रणाली पर हमला किया और लोकप्रिय हिंदू धर्म में सुधार करने की कोशिश की.
2. सामाजिक-धार्मिक सुधारों को लोकप्रिय बनाने के लिए उन्होंने 1832 साप्ताहिक दर्पण की शुरुआत की.

गोपाल हरि देशमुख

1. लोकहितवादी के नाम से लोकप्रिय.
2. इन्होने प्रसिद्ध ‘शतपत्र’ (100 पत्र) लिखे
3. इन्होने सामाजिक सुधार और आधुनिक शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय उत्थान पर जोर दिया.
4. इन्होने कहा “यदि धर्म सामाजिक सुधार की मंजूरी नहीं करता है, तो धर्म को बदल दो”.

परमहंस मंडली

1. 1849 में महाराष्ट्र में डोदाबा पांडुरंग, बाल शास्त्री जम्बेकर और आर. जी. भंडारकर ने स्थापना की.
2. एक देवता एवं विश्व बंधुता में विश्वास.
3. उन्होंने विधवा पुनर्विवाह और महिलाओं की शिक्षा की भी वकालत की.

छात्र साहित्यिक और वैज्ञानिक समाज (Students Literary & Scientific Societies)

1. 1848 में बॉम्बे और पूना में कुछ शिक्षित युवा छात्रों द्वारा गठन, इन्हें ज्ञान प्रकाश मंडली के नाम से भी जाना जाता था और गुजराती एवं मराठी में इनकी शाखाएं थीं.
2. उन्होंने प्रचलित विज्ञान और सामाजिक मुद्दों पर एक व्याख्यान का आयोजन किया था.
3. इसका एक उददेश्य लड़कियों के लिए विद्यालय शुरू करना था.



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